हज़ार वजहें हैं खुश रहने की… फिर भी न जाने क्यों उदास रहते हैं।
जिसको आबाद करते करते मेरे मां-बाप की जिंदगी लग गई…!
बैठे बैठे भीग जाती है पलकें दर्द छुपाना नहीं आता
जज़्बात जब काग़ज़ पर उतारे तो पता चला—
इस शहर में जीने के अंदाज़ भी क्या निराले हैं,
तुम्हारी बातोँ में मेरा जिक्र भी आता होगा,
लड़कों का दर्द हमेशा छुपा रहता है नज़रों पर।
जिंदगी भी अब हो गई है बेमकसद और नाराज़।
फिर सब वैसा ही होगा, जैसी ये ज़मीं होगी।
पर वो तारा नहीं टूटता ,जिसे देखकर तुम्हें मांग लूँ
मुझे इसलिए बनाया उस भगवान ने, क्योंकि वो देखना चाहते थे, इंसान किस हद तक दर्द सह सकता है…!
किसी के पास यकीन का कोई इक्का हो तो बताना,
हमारे हिस्से में बस टूटी हुई खामोशियाँ आईं,
ज़ख्म पुराने हुए कोई तो Sad Shayari in Hindi नया ज़ख्म दे जाओ